बकरे का दूध – अकबर और बीरबल की कहानी

एक दफा बादशाह ने बीरबल से कहा की बीरबल हमारी बेगम को कुछ दिन से बराबर सिर में दर्द रहता है ।

और किसी ओझा ने इसकी दवा बनाने के लिए बकरे का दूध मांगा है । अतः हमें कहीं से भी बकरे का दूध मंगवाकर दो । बीरबल समझ गया की ओझा ने बादशाह को मूर्ख बनाया है ।

घर जाकर उसने अपनी लड़की को समझाया और वह फौरन ही रात्री के समय बादशाह के महल के पास यमुना में कपड़े धोने लगी बादशाह की नींद में विघ्न पड़ा तो बादशाह ने फौरन उसे बुलाकर पूछा कि तू कौन है और रात के समय कपड़े क्यों धो रही है ।

लड़की ने कहा-हुजूर मैं बीरबल कि लड़की हूँ अभी शाम को ही बीरबल के पेट से बच्चा पैदा हुआ है मैं उन्ही के कपड़े धो रही हूँ ।

बादशाह ने कहाँ लड़की? क्या तू पागल तो नही है कहीं मर्द के पेट से बच्चा हुआ है ।

लड़की ने कहा तो हुजूर कहीं बकरे का भी दूध होता है ।

लड़की की बात सुनते ही बादशाह सब समझ गए और उसे इनाम देकर घर भिजवा दिया ।

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